पैसिफिक पोस्ट पार्टम सपोर्ट सोसायटी

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हिंदी भाषा में जानकारी

छोटे बच्चों वाली माताएं अथवा गर्भवती महिलाएं

 

क्या आप उदास महसूस कर रहीं हैं ,
मन घबराई हुई हैं?
चितिंत या सुन्न हैं?

हम समझते हैं। हम सहायता कर सकते हैं।

 

टेलीफोन सहायता: (604) 255-7999

निशुल्क: (855) 255-7999

www.postpartum.org

(हम सेल्फ-रेफरल स्वीकार करते हैं)

हम संपूर्ण लोअर मेनलैंड में टेलीफोन सहायता और साप्ताहिक सहायता ग्रुप प्रस्ताव कराते हैं।

हम पिताओं की भी मदद कर सकते हैं?

(शुरुआती संपर्क अंग्रेज़ी बोलने वाले स्टाफ से होगा। मौजूदा वालंटीयरों पर निर्भर करते हुए, हम हिंदी अथवा दूसरी भाषा में सहायता की व्यवस्था कर सकते हैं।)

प्रसव-पश्चात डिप्रेशन और चिंता (PPD/A) के बारे में कुछ जानकारी

15% से 20% माताएं PPD/A से गुजरती हैं
10% पिताओं को PPD/A होता है

गर्भवती महिलाओं और उन माता-पिता को, जो बच्चा गोद लेते हैं, उनको भी PPD/A हो सकता है

 

ये अनुभूतियां…

गर्भ के दौरान, बच्चे के जन्म के बाद, अथवा प्रसव बाद की अवधि में कई महीने बाद शुरू हो सकती हैं

कुछ सप्ताह अथवा महीनों तक अथवा प्रसव के बाद एक साल तक भी रह सकती हैं

पहले बच्चे के जन्म अथवा बाद के बच्चों के जन्म के बाद शुरू हो सकती हैं। यदि मां को डिप्रेशन का पिछला अनुभव है, तो PPD/A होने की संभावना बढ़ जाती है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रसव के बाद की उदासी अथवा चुनौतियों में महिला का दोष नहीं होता। इन भावनाओं का ये मतलब नहीं है कि  वह नाकाबिल है ,पागल है या कमज़ोर है।

सही उपचार और सहायता के द्वारा, आप बेहतर महसूस करने लगेंगी और ठीक हो जाएंगी।

 

क्या आपके साथ यह हो रहा है?

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  • अक्सर अथवा बिना किसी स्पष्ट कारण के रोना
  • सुन्न हो जाना
  • असहाय महसूस करना अथवा दैनिक काम-काज न कर पाना
  • अकेले होने का डर
  • ऐसा महसूस होना कि कुछ गड़बड़ है
  • डरावने या भयभीत करने वाले विचार आना
  • अपने बच्चे के बारे में जरूरत से ज्यादा चिंता करना
  • बच्चे के प्रति उदासीनता, बच्चे से जुड़ाव न होना
  • डिप्रेशन या अवसाद जो उदासी से लेकर आत्महत्या के विचारों तक जा सकता है।
  • चिंता अथवा घबराहट के दौरे आना
  • गुस्सा और आक्रामकता
  • नींद आने में कठिनाई होना
  • भूख न लगना
  • बच्चे अथवा घर के सदस्यों के प्रति नाराजगी
  • अकेलापन, बेसहारा महसूस करना
  • खुद को अधूरा, बेकार महसूस करना

 

यदि आपके सबसे छोटे बच्चे की उम्र तीन वर्ष से कम है, अथवा यदि आप इस समय गर्भवती हैं और आपको ऊपर बताई कोई भी अनुभूति होती है, तो हम आपकी सहायता कर सकते हैं।

  • दक्षिण एशियाई आप्रवासियों के सामने नीचे दी गई और भी चुनौतियां एवं बाधाएं आ सकती हैं:
  • भाषा संबंधी कठिनाई
  • संबंधियों के साथ रहने से टकराव हो सकता है; संबंधी कभी-कभी मदद करने के बजाए बोझ बन जाते हैं
  • बच्चे के जन्म से पहले जो घरेलू और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभा रही थीं उन्हें करते रहने का दबाव महसूस करना
  • कैनेडा में एक नया सामाजिक दायरा बनाने में कठिनाई; अलग-थलग महसूस करना
  • वित्तीय दबाव; यह लगना कि दूसरों को काम करना ही चाहिए अतः वे मां की मदद नहीं कर सकते
  • अपनी संस्कृति और परंपराओं की कमी खलना
  • अपने देश में परिवार और मित्रों की याद आना
  • ऐसे लोगों से दूर होना जो बच्चे की देखभाल में मदद कर सकते थे
  • संसाधनों के बारे में जानकारी का अभाव अथवा उन तक पहुंच का अभाव; आपको मालूम नहीं हो कि मदद के लिए कहां जाएं
  • कैनेडा की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बारे में जानकारी का अभाव
  • डॉक्टरों द्वारा किए गए निदान अथवा निर्देशों समझने में कठिनाई
  • नए वातावरण के अनुकूल ढलने में कठिनाई
  • मूल देश में प्रसव-पश्चात डिप्रेशन और चिंता के बारे में बात नहीं की जाती है, इस लिए महिलाएं अकेलापन और शर्मिंदगी महसूस करती हैं
  • मूल देश में शिक्षा के अभाव और मानसिक बीमारी से जुड़े बदनामी के दाग की वजह से महिलाएं मदद नहीं लेती हैं
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ਔਰਤਾਂ ਦੇ ਬੋਲ:

“मुझे बच्चे के जन्म लेने से पहले ही चिंता सताने लगी थी, पैसे की चिंता और काम बंद करने की चिंता।”
“प्रसव-पीड़ा के दौरान, मैं दर्द से चिल्लाती रही थी। पेट में बच्चे की स्थिति उल्टी थी। मेरा सी-सेक्शन (सीज़ेरियन) कराना पड़ा। मैं रो रही थी, मैं बच्चे को दूध पिलाना चाहती थी लेकिन मुझे अंग्रेज़ी बोलनी नहीं आती थी। कोई मेरी मदद नहीं कर रहा था। मेरे पति मदद नहीं कर रहे थे। मैं अकेली थी। यहां मदद के लिए कोई परिवार नहीं।”
“मैं अपने बेटे के बारे में चिंतित रहती थी, जब तक वह 4 साल का नहीं हो गया। मैं ज्यादा नहीं सो पाती थी क्योंकि मैं उसे अपने साथ सुलाती थी ताकि मुझे पता चल जाए कि कहीं उसकी सांस तो नहीं रुक गई है।”
“भारत में तो परिवार से और यहां तक कि नौकरों से भी बहुत मदद मिलती थी। कैनेडा में, केवल मुझे और मेरे पति को सारी जिम्मेदारी उठानी है।”
“मेरी मां ने अकेले ही चार बच्चों को बड़ा किया। मेरी तो केवल एक लड़की है और यह भी मुझे बहुत मुश्किल काम लग रहा है।”
“मैंने नर्स से बात की और तब जाना कि मुझे डिप्रेशन है। मैंने सोचा, यह जीवन मेरा है, मुझे मदद लेनी है और खुद की मदद करनी है।”
“मैं नई मांओं को बताती थी कि वे मदद ले सकती हैं। सहायता करने वाले लोगों के साथ रहने का प्रयास करें। बच्चा केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। नई मां सारे काम नहीं कर सकती। उस घर में रहने वाले उसके सास-ससुर, देवर-जेठ अथवा ननद की यह जिम्मेदारी है कि वे अच्छा माहौल बनाएं। ताकि बच्चे पर उसका अच्छा प्रभाव पड़े।”
यदि आप इनमें से किसी भी महिला की तरह महसूस करती हैं, तो पैसिफिक पोस्ट पार्टम सपोर्ट सोसायटी को कॉल करें। हम सहायता कर सकते हैं।

Funding for this section provided by Integrated Primary and Community Care, Vancouver Coastal Health.